प्रयागराज | विधिक संवाददाता
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि यदि दो बालिग व्यक्तियों ने अपनी स्वतंत्र इच्छा और सहमति से विवाह किया है, तो किसी भी व्यक्ति को उनके वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। न्यायालय ने कहा कि ऐसे दंपति को संविधान द्वारा प्रदत्त जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का संरक्षण प्राप्त है।
माननीय डॉ. जस्टिस गौतम चौधरी की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि याचिकाकर्ता दोनों बालिग हैं और अपनी इच्छा से पति-पत्नी के रूप में साथ रह रहे हैं। याचिका में आरोप लगाया गया था कि परिवार के कुछ सदस्य उनके वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप कर रहे हैं तथा उन्हें धमकियां दी जा रही हैं।
न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के Gian Devi, Lata Singh तथा Bhagwan Dass सहित विभिन्न महत्वपूर्ण निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि बालिग व्यक्ति को अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ रहने और जीवन व्यतीत करने का पूर्ण अधिकार है। परिवार अथवा अन्य कोई व्यक्ति उसकी स्वतंत्र पसंद में हस्तक्षेप नहीं कर सकता।
हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि यदि याचिकाकर्ता अपने शांतिपूर्ण जीवन में किसी प्रकार के व्यवधान की शिकायत लेकर संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक के समक्ष आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत करते हैं, तो संबंधित पुलिस अधिकारी उन्हें तत्काल आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराएंगे।
इस मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता कुमार अनुभव श्रीवास्तव एवं अधिवक्ता मोहम्मद ताहिर ने प्रभावी पैरवी की।















